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जब तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे की नसें फैल जातीं हैं, पतली और तनी हà¥à¤ˆ होती है, तो इसे वैरिकाज़ नस के रूप में जाना जाता है। नसों की दीवारों का पतला होना, à¤à¥€à¤¤à¤° के वालà¥à¤µà¥‹à¤‚ की विफलता के कारण होता है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प रकà¥à¤¤ का जमाव होने लगता है, और उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ, पतली नसें दिखने लगती हैं जो तकलीफ देने लगती हैं।
ये उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नसें शरीर के ऊपरी सतह पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शिराओं यानी वेनà¥à¤¸ का जाल है, जो सामानà¥à¤¯ परिसà¥â€à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उà¤à¤¾à¤° नहीं लेती हैं और शरीर के अंदर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ मोटी-मोटी शिराओं वाले सिसà¥à¤Ÿà¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ रहती हैं। ऊपरी सतह में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शिराओं का जाल ऊपरी सतह से अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून को इकटà¥à¤ ा कर शरीर की गहराई में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बड़ी शिराओं के सिसà¥à¤Ÿà¤® में पहà¥à¤‚चाता है, जहां से सारा अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून इकटà¥à¤ ा होकर दिल से होते हà¥à¤ फेफड़े में शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤•रण के लिठपहà¥à¤‚चता है। अगर किसी वजह से शरीर के अंदर गहराई में सà¥â€à¤¥à¤¿à¤¤ मोटी शिराओं के सिसà¥à¤Ÿà¤® में रà¥à¤•ावट आ जाती है तो ये बाहरी सतह से आने वाले खून को सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं कर पाता है जिससे अशà¥à¤¦à¥à¤§ बजाय अंदर जाने के खाल के अंदरà¥à¤¨à¥€ सतह में समाहित रहता है जिससे खाल के नीचे सà¥à¤¥à¤¿â€à¤¤ शिराओं के सिसà¥à¤Ÿà¤® में अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून की मातà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने से ये नीली नसें खाल के ऊपर उà¤à¤°à¤•र बड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में दिखाई देने लगती है।
जांघों या टांगों में उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नीली नसों का दिखना
अगर आपकी जांघ में मकड़ी के जाले की तरह जगह-जगह नीली नसें उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ दिख रही हैं तो इसको सामानà¥à¤¯ न समà¤à¥‡à¤‚। इसको किसी वैसà¥à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¤° या कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹ वैसà¥à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¤° सरà¥à¤œà¤¨ को दिखाकर उनकी सलाह जरूर लें। इस तरह की उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नीली नसों के दो कारण होते हैं- à¤à¤• कारण कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• वीनस इनà¥à¤¸à¤«à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨à¥à¤¸à¥€ यानी सीवाआई का रोग है जिसमें वेन के अंदर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कपाट यानी दरवाजे कमजोर पड़ जाते हैं। सामानà¥à¤¯à¤¤: इन शिराओं में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कपाट अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून को à¤à¤• ही दिशा में ऊपर चढ़ाने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ देते हैं जिससे टांगों में अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ इकटà¥à¤ ा न हो पाà¤à¥¤ ऊपर चढ़ा हà¥à¤† खून अगर वापस आने की कोशिश करता है तो ये कपाट आपस में बंद हो जाते हैं जिससे खून नीचे वापस नहीं आ पाता है। जब ये कपाट किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों से बंद हो जाते हैं या इनकी संरचना में कोई गंà¤à¥€à¤° परिवरà¥à¤¤à¤¨ हो जाता है तो ऊपर चढ़ने वाले खून का कà¥à¤› या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हिसà¥à¤¸à¤¾ इन कपाटों के कमजोर होने की वजह से ऊपर जाकर फिर â€à¤¨à¥€à¤šà¥‡ की ओर आ जाता है।
ये वापस आने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ निरंतर दोहराठजाने पर अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून खाल के नीचे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शिराओं में इकटà¥à¤ ा होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है जिससे खाल पर नीली नसों का उà¤à¤¾à¤° दिखने लगता है। ये शिराओं में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कपाट लोगों में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ नियमित न चलना व वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® का अà¤à¤¾à¤µ होने से कमजोर पड़ जाते हैं और अपना कारà¥à¤¯ सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥ रूप से नहीं कर पाते। कपाटों की संरचना में परिवरà¥à¤¤à¤¨ नसों में खून के कतरे कà¥à¤› समय के लिठइकटà¥à¤ ा होने की वजह से आंशिक रूप से नषà¥à¤Ÿ हो जाते हैं जिससे वे आपस में ठीक से बंद नहीं हो पाते जिससे ऊपर चढ़ा हà¥à¤† अशà¥à¤¦à¥à¤§ खून नीचे आना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है और खाल के नीचे उà¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ नस दिखने लगती है।
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